शुभेच्छा

नमस्कार,

संस्कारों , परंपराओं के प्रति सम्मान और उत्सुकता, स्वयं को जानने के सार्थक प्रयास आपको समृद्ध करें।आपको अपने मनोरथ पूर्णता की ओर जाते दिखें।

ईश्वर की अपार अनुकंपा आप पर सदैव बनी रहे।

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सुभाषित

सत्वं सुखे सञ्जयति रज: कर्मणि भारत।

ज्ञानमावृत्य तु तम: प्रमादे सञ्जयत्युत॥

हे अर्जुन! सत्त्वगुण मनुष्य को सुख में बाँधता है, रजोगुण मनुष्य को सकाम कर्म में बाँधता है,और तमोगुण मनुष्य के ज्ञान को ढँक कर प्रमाद में बाँधता है।

O scion of the Bharata dynasty, sattva attaches one to happiness, rajas to action,while tamas, covering up knowledge, leads to inadvertence also.

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